सांतवी पंचवर्षीय योजना 1985-90 खण्ड-II
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Publisher
Planning Commission, Government of India
Abstract
ऋण संबंधी विभिन्न संस्थाओं के कार्यचालन में तथा उनमें
समन्वय स्थापित करने की दृष्टि से राज्य स्तर पर सहकारी समितियां
पहले ही स्थापित को जा चुकी हैँ। फिर भी ये समितियां विभिन्न संस्थाओं
के कार्यचालन में आ्रावश्यक समन्वय स्थापित नहीं कर पाई हूँ । इसके
परिणामस्वरूप वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण अधिकतर उन
क्षेत्रों में दिए जाने लगे हैँ जहां कि पहले ही सहकारिता की सुदृढ़ व्यवस्था
थी | संस्थागत ऋण एजेंसियों के कार्यवालन की इस कमी को सातबीं
य्रोजना के दौरान ठीक कर दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर ऋण
योजनाएं बनानी होंगी। ऐसी आशा की जाती है कि इन योजनाओं से
आवश्यक समन्वयात्मक तथा विशेष भूमिकाओं तथा जिस्मेदारियों को निर्धारित
करने में सहायता मिलेगी जिनका पालन उस क्षेत्र में चल रही ऋण
संबंधी विभिन्न संस्थाओ्रों में होता है।
Description
भारत सरकार योजना आयोग
Keywords
सांतवी पंचवर्षीय योजना- भारत, भारत में आर्थिक विकास एवं आर्थिक परिस्थितियाँ
Citation
Planning Commission - 1985


