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(National Institution for Transforming India)

Government of India

   

तीसरी योजना मध्यावधि मूल्यांकन

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Planning Commission, Government of India

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तीसरी पंचवर्षीय योजना का मध्यावधि मूल्यांकन इस उद्देश्य को सामने रख कर किया गया है कि योजना के कार्यान्वयन के उन सभी पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, तथा अगले दो वर्षों में अधिक तीव्र गति से प्रगति की जा सके । इस प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि 1961-62 से 1963-64 तक की तीन वर्षों की अवधि में योजना के कार्यक्रमों और नीतियों के पालन करने में कितनी प्रगति हुई है। जहां कहीं संभव है, उपलब्ध सूचना के आधार पर यह बताने का प्रयत्न किया गया है कि योजना की अवधि के अंत तक उत्पादन और विकास के स्तरों में संभावित उपलब्धि कितनी होगी । 8 और 9 नवम्बर, 1963 को राष्ट्रीय विकास परिषद की बीसवीं बैठक हुई जिसमें योजना आयोग के मूल्यांकन प्रतिवेदन पर विचार-विमर्श हुआ। इस प्रतिवेदन के अंत में दिये गए वक्तव्य में बताया गया है कि योजना-आयोग के निष्कर्षों और सिफारिशों को राष्ट्रीय विकास परिषद ने मोटे तौर पर स्वीकार कर लिया है और यह निश्चय किया है कि केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारें इस कमी को दूर करने के लिये तुरन्त आवश्यक कदम उठायें तथा तीसरी योजना के उद्देश्य और लक्ष्यों को पूरा करें। परिषद ने कृषि उत्पादन की प्रगति का पर्यवेक्षण किया और कुछ मुख्य वातों की ओर ध्यान दिलाया जो कृषि उत्पादन को बढ़ाने के भरपूर प्रयत्नों के लिए जरूरी हैं।

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तीसरी योजना- भारत

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