NITI Aayog Library

(National Institution for Transforming India)

Government of India

   

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) का मध्यावधिक मूल्यांकन विशिष्टताएं

Abstract

प्रस्तुत विवरण नौवीं पंचवर्षीय योजना के मध्यावधिक मूल्यांकन के संदर्भ में देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, संसाधन जुटाव, निवेश प्रवृत्तियों तथा प्रमुख क्षेत्रीय निष्पादनों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। योजना के प्रथम तीन वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद की औसत वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही, जो निर्धारित 6.5 प्रतिशत लक्ष्य से कम थी। कृषि, खनन, उत्खनन तथा विनिर्माण क्षेत्रों में अपेक्षित संवृद्धि प्राप्त नहीं हो सकी, जबकि निर्माण, संचार, सार्वजनिक प्रशासन तथा सामुदायिक सेवाओं में निष्पादन लक्ष्यों से बेहतर रहा। घरेलू बचत और निवेश दोनों ही लक्ष्यों से उल्लेखनीय रूप से कम रहे, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र में, जहाँ सार्वजनिक बचत में लगभग 70 प्रतिशत तथा सार्वजनिक निवेश में 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, गैर-सरकारी निवेश अपेक्षाकृत बेहतर रहा। राजकोषीय स्थिति में गिरावट का मुख्य कारण कर राजस्व, विशेषकर केन्द्रीय कर प्राप्तियों में कमी तथा गैर-योजना राजस्व व्यय में तीव्र वृद्धि रहा, जिसमें ब्याज भुगतान, वेतन संशोधन और सब्सिडियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा बढ़कर असंधारणीय स्तरों के निकट पहुँच गया। भुगतान संतुलन की स्थिति, अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम कीमतों में वृद्धि के बावजूद, अपेक्षाकृत संतोषजनक रहने की संभावना व्यक्त की गई है तथा विदेशी प्रत्यक्ष एवं पोर्टफोलियो निवेश में वृद्धि की उम्मीद की गई है। तथापि, योजना अवधि के अंत तक कुल योजना लक्ष्यों का केवल लगभग 87 प्रतिशत ही प्राप्त होने का अनुमान है, जो आठवीं योजना की तुलना में कम संतोषजनक है।

Description

योजना आयोग भारत सरकार नई दिल्ली (अक्तूबर 2000)

Keywords

नौवीं पंचवर्षीय योजना, मध्यावधिक मूल्यांकन, सकल घरेलू उत्पाद, सार्वजनिक निवेश, सार्वजनिक बचत, राजकोषीय घाटा, भुगतान संतुलन, विदेशी निवेश, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, राजस्व व्यय, संरचनात्मक बाधाएँ

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