छठी पंचवर्षीय योजना 1980-85 आधारस्वरूप
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योजना आयोग, भारत सरकार
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छठी पंचवर्षीय योजना का आरम्भ एक ऐसे नए दशक के साथ हुआ जिसमें भारत के विकास का प्रमुख लक्ष्य समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और आत्मनिर्भरता के सिद्धान्तों पर आधारित आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करना था। योजनाबद्ध विकास के पिछले तीन दशकों में कृषि, उद्योग, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। कृषि में तकनीकी परिवर्तन से उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली सुदृढ़ बनी। उद्योग क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता बढ़ी और लघु एवं ग्राम उद्योगों में नई क्षमताओं का विकास हुआ। सके बावजूद छठी योजना अत्यंत कठिन आर्थिक परिस्थितियों में प्रारम्भ की गई। तीव्र मुद्रास्फीति, ऊर्जा एवं परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट, पेट्रोलियम आयात लागत में वृद्धि, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंदी तथा भुगतान शेष की बिगड़ती स्थिति ने विकास संभावनाओं को सीमित कर दिया। इन चुनौतियों के बीच योजना का उद्देश्य पूर्व में सृजित क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करना, संसाधनों की दक्षता बढ़ाना तथा निवेशों से अधिक प्रतिफल प्राप्त करना था। विशेष बल ऊर्जा के देशीय स्रोतों के विकास, परिवहन एवं सिंचाई के विस्तार, औद्योगिक संवृद्धि के पुनरुत्थान और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के पुनर्गठन पर दिया गया। ठी योजना के मुख्य उद्देश्यों में आर्थिक संवृद्धि दर में वृद्धि, तकनीकी आत्मनिर्भरता, गरीबी एवं बेरोजगारी में क्रमिक कमी, न्यूनतम आवश्यकताएँ कार्यक्रम के माध्यम से जीवन-स्तर में सुधार, क्षेत्रीय असमानताओं में कमी, जनसंख्या नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण तथा विकास प्रक्रिया में जन-सहभागिता को बढ़ावा देना शामिल था। योजना आयोग के अनुमानों के अनुसार, इस योजना अवधि में लगभग 5 प्रतिशत की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया, जिसके लिए निवेश, बचत और संसाधन-संचालन की सुदृढ़ रणनीति अपनाने पर बल दिया गया।
Description
भारत सरकार, योजना आयोग
Keywords
छठी पंचवर्षीय योजना-भारत , समाजवाद, आत्मनिर्भरता, आर्थिक संवृद्धि, मुद्रास्फीति दबाव, ऊर्जा संकट, औद्योगिक आधुनिकीकरण, ग्रामीण विकास, न्यूनतम आवश्यकताएँ कार्यक्रम


